General Secretary's Words

वन्दनीय कला प्रेमियों,

प्रणाम!

उन सभी गुणीजनों को धन्यवाद करना चाहती हूँ जिनकी वजह से मेरा जीवन बदल गया | 

सही तरह से विकसित होने में हमारे माता- पिता व् गुरु का बहुत बड़ा योगदान होता है | प्रत्यक्ष और कभी अप्रत्यक्ष रूप से उन्होंने हमें बहुत कुछ दिया | नृत्य में ही नहीं अपितु जीवन में भी उनके मार्गदर्शन के लिए मैं उनकी कृतज्ञ हूँ, उनसे प्राप्त एक एक शब्द के लिए मैं उनकी कृतार्थ हूँ |

एक माली की तरह वे हमें सींचते हैं हमारी देखरेख करते हैं और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं | यदि शिष्य गुरु का अनुसरण करे तो उनका रास्ता प्रकाशमय ही रहता है | बात केवल भक्ति की है, किस मन से शिष्य अपनी चेष्ठाओं को गुरु के चरणों में अर्पित करता है | 

नृत्य में शरीर में लचीलापन, संतुलन व् मन की सौम्यता नृतक को सम्पूर्ण बनाते हैं | ऐसा तभी संभव होता है जब शरीर, बुद्धि व् भावना में सामंजस्य हो | इस मार्ग पर चलते - चलते अनंत आनंद का अनुभव होता है | इसकी चरम सीमा ही शायद परमात्मा का दर्शन है | 



धन्यवाद !

रूबी मिश्रा

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